संक्षेप में: धारचूला से आगे गुंजी, आदि कैलाश और ॐ पर्वत की ओर जाने वाले हर भारतीय यात्री को इनर लाइन परमिट (ILP) चाहिए। यह परमिट पिथौरागढ़ ज़िले के धारचूला स्थित SDM (उप-ज़िलाधिकारी) कार्यालय से जारी होता है। सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, मेडिकल फ़िटनेस प्रमाणपत्र और हाल का पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र तैयार रखें। सबसे अच्छे महीने आम तौर पर मई–जून और सितंबर के मध्य से अक्टूबर हैं। मानसून में और सर्दियों में सीज़न बंद होने के बाद परमिट सामान्यतः रोक दिए जाते हैं।
- कौन जारी करता है: SDM कार्यालय, धारचूला (पिथौरागढ़ ज़िला प्रशासन)
- ऑनलाइन? व्यवस्था साल-दर-साल बदलती है। यात्रा से पहले जाँच लें (विवरण नीचे)।
- विदेशी नागरिक और OCI धारक: सामान्य ILP में शामिल नहीं
- मुख्य पड़ाव: धारचूला, गुंजी, नाभीढांग (ॐ पर्वत दर्शन), ज्योलिंगकांग (आदि कैलाश और पार्वती कुंड)
2027 यात्रा सीज़न के लिए अपडेट (तथ्य अक्टूबर 2026 में जाँचे गए)
आदि कैलाश और ॐ पर्वत पिथौरागढ़ ज़िले की व्यास घाटी में, भारत–नेपाल–तिब्बत सीमा के बिल्कुल पास हैं। सीमा क्षेत्र होने के कारण यहाँ केदारनाथ या बद्रीनाथ की तरह सीधे गाड़ी लेकर नहीं जा सकते। इसके लिए परमिट, फ़िटनेस जाँच और मौसम को ध्यान में रखकर योजना चाहिए।
यह गाइड काग़ज़ी प्रक्रिया को क़दम-दर-क़दम आसान शब्दों में समझाती है। साथ ही मार्ग, मुख्य दर्शन स्थल, सही महीने और रास्ते में क्या मिलेगा, यह भी बताती है। यह उन परिवारों और बुज़ुर्ग यात्रियों के लिए लिखी गई है जो बुकिंग से पहले पूरी तस्वीर समझना चाहते हैं।
इनर लाइन परमिट क्या है और क्यों ज़रूरी है?
इनर लाइन परमिट एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है, जिससे भारतीय नागरिक कुछ संरक्षित सीमा क्षेत्रों में सीमित समय के लिए जा सकते हैं। इस यात्रा में संरक्षित क्षेत्र धारचूला के आगे से शुरू होता है, जिसमें बुदी, गुंजी, नाभी, कुटी, ज्योलिंगकांग, कालापानी और नाभीढांग जैसे गाँव और पड़ाव आते हैं।
रास्ते में कई चेकपोस्ट पर सुरक्षा बल परमिट जाँचते हैं, और गुंजी इनमें मुख्य है। बिना वैध परमिट के आपको लौटा दिया जाएगा। इसीलिए होटल के बारे में सोचने से भी पहले परमिट की व्यवस्था करनी चाहिए।
परमिट किसे मिल सकता है?
- भारतीय नागरिक: हाँ, वैध पहचान पत्र और नीचे दिए सहायक दस्तावेज़ों के साथ।
- विदेशी पासपोर्ट धारक और OCI/PIO कार्ड धारक: सामान्य ILP उन पर लागू नहीं होता। यात्रा गाइडों के अनुसार उन्हें भारत सरकार से अलग संरक्षित-क्षेत्र अनुमति चाहिए, और मंज़ूरी की गारंटी नहीं है।
- बच्चे और बुज़ुर्ग: हर सीज़न के लिए उम्र का कोई एक प्रकाशित नियम नहीं है। बुज़ुर्ग यात्री, ख़ासकर 60 वर्ष से ऊपर, ज़्यादा बारीक मेडिकल जाँच की उम्मीद रखें। कुछ पैकेज, जैसे KMVN का हेलीकॉप्टर पैकेज, पिछले सीज़नों में अपनी उम्र-सीमा तय करते रहे हैं।
आदि कैलाश परमिट कैसे मिलता है: क़दम-दर-क़दम
क्या 2026 में ऑनलाइन आवेदन था?
हमने इसे ध्यान से जाँचा। 2025 में यात्रा समाचारों के अनुसार सीज़न खुलने से पहले एक आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। 2026 के लिए मई में स्थानीय समाचारों में आवेदन आसान बनाने वाली एक नई परमिट सुविधा की ख़बर आई। फिर भी हमें कोई ऐसा साफ़ नाम वाला आधिकारिक पोर्टल नहीं मिला जिससे पूरी प्रक्रिया घर बैठे पूरी हो जाए।
2026 की कई यात्रा गाइडें बताती हैं कि पहले ऑनलाइन रजिस्टर करने के बाद भी दस्तावेज़ों की जाँच और परमिट लेना धारचूला में ही होता है। इसलिए धारचूला में कम से कम एक कार्य-दिवस का समय रखें। 2027 के लिए घर से निकलने से पहले अपने ऑपरेटर या SDM कार्यालय धारचूला से पूछ लें कि कौन-सी व्यवस्था चल रही है।
धारचूला में सामान्य ऑफ़लाइन प्रक्रिया
- SDM, धारचूला के नाम एक छोटा आवेदन लिखें। उसमें यात्रा की तिथियाँ, लोगों की संख्या और हर व्यक्ति का नाम व उम्र लिखें।
- पुलिस सत्यापन कराएँ। यह आम तौर पर अपने घर के थाने से या स्थानीय स्तर पर हो जाता है। गाइडों के अनुसार जमा करते समय प्रमाणपत्र लगभग 15 दिन से पुराना नहीं होना चाहिए।
- MBBS डॉक्टर से मेडिकल फ़िटनेस प्रमाणपत्र लें। यह अपने शहर में या धारचूला के सरकारी अस्पताल में बन सकता है।
- सब कुछ जमा करें, पहचान पत्रों की प्रतियों और फ़ोटो के साथ, SDM कार्यालय में।
- सत्यापन के बाद परमिट लें। पूरी यात्रा में मूल परमिट और उसकी दो फ़ोटोकॉपी साथ रखें।
SDM कार्यालय सरकारी कार्य-दिवसों पर चलता है। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर यह सामान्यतः बंद रहता है, इसलिए शनिवार रात पहुँचकर रविवार को परमिट मिलने की उम्मीद न रखें। मई–जून की भीड़ में एक दिन से ज़्यादा भी लग सकता है।
दस्तावेज़ों की सूची
| दस्तावेज़ | क्या साथ रखें | ध्यान दें |
|---|---|---|
| फ़ोटो पहचान पत्र | आधार, वोटर ID, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस | मूल और 2 फ़ोटोकॉपी |
| फ़ोटो | हर व्यक्ति की 2–4 हाल की पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो | कुछ अतिरिक्त रखें |
| मेडिकल फ़िटनेस प्रमाणपत्र | MBBS डॉक्टर के हस्ताक्षर सहित | उसमें लिखा हो कि आप ऊँचाई की यात्रा के लिए फ़िट हैं |
| पुलिस सत्यापन | थाने का प्रमाणपत्र | हाल का हो (लगभग 15 दिन) |
| शपथ-पत्र / क्षतिपूर्ति-पत्र | माँगा जाए तो स्टांप पेपर पर नोटरी से | कुछ सीज़नों में और कुछ ऑपरेटर माँगते हैं |
| आपातकालीन संपर्क | परिवार के किसी सदस्य का नाम और फ़ोन नंबर | आवेदन में लिखें |
परमिट शुल्क कम है, पर राशि समय-समय पर बदलती है। कार्यालय में ताज़ा शुल्क पूछ लें। हमने यहाँ कोई राशि नहीं लिखी, क्योंकि 2026 की आधिकारिक राशि हम पक्की नहीं कर पाए।
मेडिकल प्रमाणपत्र और स्वास्थ्य जाँच
यह यात्रा धारचूला के लगभग 900 मीटर से ज्योलिंगकांग में 4,000 मीटर से काफ़ी ऊपर तक जाती है। कुछ ही दिनों में यह बहुत बड़ी चढ़ाई है, और मुख्य ख़तरा पैदल चलना नहीं, बल्कि पतली हवा है।
- पहले घर पर ठीक से जाँच कराएँ: ब्लड प्रेशर, शुगर, ECG, और अस्थमा हो तो फेफड़ों की जाँच।
- डॉक्टर को साफ़ बताएँ कि कहाँ और कितनी ऊँचाई पर जा रहे हैं। सिर्फ़ “यात्रा के लिए फ़िट” वाला पर्चा काफ़ी न हो, ऐसा हो सकता है।
- गुंजी में चिकित्सा कर्मी यात्रियों की जाँच कर सकते हैं। ऊँचाई की बीमारी के लक्षण दिखने पर आगे न जाने को कहा जा सकता है।
- पूरी यात्रा के लिए अपनी नियमित दवाइयाँ रखें, और सड़क बंद होने की स्थिति के लिए कुछ दिन की अतिरिक्त भी।
आम चेतावनी के लक्षण हैं: ऐसा सिरदर्द जो न जाए, उल्टी, आराम करते हुए भी साँस फूलना, और भ्रम। इनमें से कुछ भी दिखे, तो तुरंत अपने समूह प्रमुख को बताएँ और नीचे उतरें। नीचे आना ही सबसे भरोसेमंद इलाज है।
मार्ग: मैदान से आदि कैलाश और ॐ पर्वत तक
ज़्यादातर सड़क कार्यक्रम काठगोदाम या टनकपुर रेलवे स्टेशन से शुरू होते हैं। ये कुमाऊँ से होकर पिथौरागढ़ पहुँचते हैं और फिर नेपाल के सामने काली नदी के किनारे बसे धारचूला तक। परमिट के बाद सड़क नदी के साथ घाटी में ऊपर गुंजी तक जाती है, जहाँ से आदि कैलाश और ॐ पर्वत के रास्ते अलग होते हैं।
| स्थान | लगभग ऊँचाई | क्यों महत्वपूर्ण |
|---|---|---|
| पिथौरागढ़ | लगभग 1,600 मीटर | मुख्य शहर और हेलीपैड; रात्रि विश्राम |
| धारचूला | लगभग 900 मीटर | परमिट कार्यालय, KMVN बेस कैंप, आख़िरी ठीक-ठाक बाज़ार |
| गुंजी | लगभग 3,200 मीटर | दोनों दर्शनों का आधार, होमस्टे, चेकपोस्ट, विश्राम दिवस |
| नाभीढांग | लगभग 4,300 मीटर | ॐ पर्वत का दर्शन स्थल |
| ज्योलिंगकांग | लगभग 4,400 मीटर | आदि कैलाश दर्शन, पार्वती कुंड, शिव मंदिर |
ऊँचाई लगभग है और अलग-अलग स्रोतों में सौ-एक मीटर का अंतर मिलता है।
गुंजी: आपका आधार और विश्राम स्थल
गुंजी सीमा का एक गाँव है जहाँ कुटी घाटी काली घाटी से मिलती है। ज़्यादातर समूह यहाँ होमस्टे या साधारण गेस्टहाउस में दो-तीन रात रुकते हैं। एक दिन ॐ पर्वत और दूसरे दिन आदि कैलाश जाकर लौट आते हैं। यहाँ एक विश्राम दिवस से शरीर ऊपर जाने से पहले ऊँचाई का अभ्यस्त हो जाता है।
नाभीढांग से ॐ पर्वत के दर्शन
ॐ पर्वत वह चोटी है जिस पर बर्फ़ पवित्र “ॐ” जैसे आकार में जमती है। इस पर चढ़ना नहीं होता। इसके दर्शन गुंजी से आगे, पुराने लिपुलेख दर्रे के नीचे नाभीढांग पड़ाव से होते हैं। कई समूह रास्ते में कालापानी में काली मंदिर और वेद व्यास से जुड़ी गुफा के दर्शन भी करते हैं। बादल चोटी को ढक सकते हैं, इसलिए सुबह जल्दी जाने पर साफ़ दर्शन की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है।
ज्योलिंगकांग में आदि कैलाश, पार्वती कुंड और गौरी कुंड
आदि कैलाश, जिसे छोटा कैलाश भी कहते हैं, कुटी घाटी में ज्योलिंगकांग के ऊपर स्थित है। गुंजी से सड़क कुटी गाँव से होकर जाती है। 2025 के अंत की यात्रा रिपोर्टों के अनुसार ज्योलिंगकांग तक सड़क पक्की हो गई थी, जिससे सफ़र पहले से काफ़ी छोटा हो गया है।
ज्योलिंगकांग में पवित्र पार्वती कुंड (पार्वती सरोवर) के पास एक शिव मंदिर है, और साफ़ दिन में चोटी का प्रतिबिंब सरोवर में दिखता है। गौरी कुंड थोड़ा आगे, पर्वत के चरणों में है। इस ऊँचाई पर यह छोटी लेकिन खड़ी चढ़ाई है, इसलिए बुज़ुर्ग धीरे चलें या मंदिर क्षेत्र से ही दर्शन करके संतोष करें।
रास्ते में जागेश्वर और पाताल भुवनेश्वर
कई कार्यक्रमों में कुमाऊँ के दो प्रसिद्ध मंदिर जोड़े जाते हैं:
- जागेश्वर धाम, अल्मोड़ा के पास प्राचीन पत्थर के शिव मंदिरों का समूह, जिसके दर्शन अक्सर काठगोदाम से ऊपर जाते समय होते हैं।
- पाताल भुवनेश्वर, गंगोलीहाट के पास गुफा मंदिर, जिसके दर्शन अक्सर चौकोड़ी होकर लौटते समय होते हैं।
इनसे लगभग एक दिन बढ़ता है, पर यात्रा पूर्ण लगती है और लंबे सड़क सफ़र भी बीच में टूट जाते हैं।
KMVN या निजी ऑपरेटर?
कुमाऊँ मंडल विकास निगम (KMVN) कुमाऊँ के लिए उत्तराखंड सरकार की पर्यटन संस्था है। यह धारचूला बेस कैंप और पर्यटक विश्राम गृह चलाता है, और इसी सड़क पर होने वाली आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा की नोडल एजेंसी है। इसने तय तिथियों वाले आदि कैलाश पैकेज सड़क से, और कुछ सीज़नों में पिथौरागढ़ से गुंजी तक हेलीकॉप्टर से भी चलाए हैं।
| बिंदु | KMVN पैकेज | निजी ऑपरेटर |
|---|---|---|
| तिथियाँ | तय बैच, सीमित सीटें | लचीली, जब आपका परिवार तैयार हो तब शुरू |
| शुरुआती स्थान | आम तौर पर तय (काठगोदाम, धारचूला या पिथौरागढ़) | देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली या किसी स्टेशन से पिकअप संभव |
| समूह | अनजान लोगों का मिला-जुला समूह | सिर्फ़ आपके परिवार का समूह संभव |
| परमिट में मदद | मार्गदर्शन मिलता है | अच्छा ऑपरेटर पहले से दस्तावेज़ इकट्ठा करके लाइन भी संभालता है |
| अतिरिक्त स्थान | मानक मार्ग | माँगने पर जागेश्वर, पाताल भुवनेश्वर, अतिरिक्त विश्राम दिवस |
दोनों विकल्प अच्छे हो सकते हैं। ज़रूरी बात यह है कि जिसके साथ आप जाएँ, वह रास्ता जानता हो, एक बफ़र दिन रखे और बुज़ुर्ग यात्रियों को जल्दी-जल्दी ऊपर न ले जाए।
यात्रा के लिए सबसे अच्छे महीने
- मई–जून: सीज़न खुलता है (2026 में 1 मई को)। भीड़ रहती है, मौसम सुहावना होता है और चोटियों पर अक्सर बर्फ़ बची रहती है।
- जुलाई–अगस्त: मानसून। 2026 में भूस्खलन के ख़तरे के कारण 2 जुलाई से परमिट रोक दिए गए।
- सितंबर के मध्य से अक्टूबर: बारिश के बाद आम तौर पर आसमान साफ़। दर्शन का बहुत सुंदर समय, पर रातें ठंडी होती हैं।
- नवंबर से आगे: सर्दियों में सड़क बंद हो जाती है। 2025 में 1 दिसंबर से बंद होने की ख़बर थी।
खुलने की तिथियाँ पहले से तय नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, 2026 में धारचूला–गुंजी सड़क पर कुलागाड़ के पास एक बेली ब्रिज बह जाने के बाद दूसरा चरण लगभग 20 सितंबर तक टाल दिया गया। जिन टिकटों का पैसा वापस नहीं होता, उन्हें बुक करने से पहले हमेशा आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करें।
सड़क की हालत और मोबाइल नेटवर्क
धारचूला से आगे की सड़क सीमा के लिए बनी थी और 2020 में लिपुलेख तक खुली। अब पूरे रास्ते गाड़ी जा सकती है, पर कुछ हिस्से संकरे, धूल भरे और भूस्खलन वाले हैं। धारचूला से आगे आम तौर पर स्थानीय बोलेरो/4×4 जैसी गाड़ियाँ चलती हैं। 2025 के अंत की यात्रा ख़बरों के अनुसार सरकार ने एक मुश्किल हिस्से से बचने के लिए धारचूला और गुंजी के बीच सुरंग को मंज़ूरी दी थी। जब तक वह नहीं बनती, बारिश के बाद देरी की उम्मीद रखें।
मोबाइल सिग्नल कमज़ोर है। BSNL कुछ जगहों पर चलता है, और धारचूला से आगे बाक़ी नेटवर्क भरोसेमंद नहीं। परिवार को बता दें कि दो-तीन दिन आपसे संपर्क न हो पाए, ऐसा हो सकता है। ऑफ़लाइन नक्शे डाउनलोड कर लें और कुछ नक़द रखें, क्योंकि धारचूला से आगे ATM और कार्ड भुगतान मुश्किल से मिलते हैं।
क्या पैक करें
- गर्म कपड़ों की परतें: थर्मल, फ़्लीस, डाउन जैकेट, ऊनी टोपी और दस्ताने, जून में भी
- अच्छी पकड़ वाले जूते, और रेन जैकेट
- धूप का चश्मा, सनस्क्रीन और लिप बाम, क्योंकि ऊँचाई पर धूप तेज़ होती है
- निजी दवाइयाँ, बुनियादी फ़र्स्ट-एड किट और छोटी टॉर्च
- हर दस्तावेज़ की फ़ोटोकॉपी, एक प्लास्टिक फ़ोल्डर में
- लंबे सफ़र के लिए सूखे मेवे और कुछ नाश्ता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या धारचूला पहुँचने वाले दिन ही आदि कैलाश परमिट मिल सकता है?
कभी-कभी, अगर आपके दस्तावेज़ पूरे हों और कार्यालय खुला हो। भीड़ वाले हफ़्तों में ज़्यादा समय लग सकता है, इसलिए धारचूला में एक बफ़र दिन रखें।
क्या आदि कैलाश के लिए पासपोर्ट चाहिए?
नहीं। आदि कैलाश और ॐ पर्वत भारत के अंदर हैं। आधार या वोटर ID जैसा भारतीय फ़ोटो पहचान पत्र काफ़ी है। पासपोर्ट पहचान के रूप में काम आता है, पर ज़रूरी नहीं।
क्या मेडिकल प्रमाणपत्र सच में जाँचा जाता है?
हाँ। यह परमिट फ़ाइल का हिस्सा है, और ऊपर जाकर यात्रियों की फिर से जाँच हो सकती है। ईमानदारी से जाँच कराएँ, क्योंकि यह आपकी अपनी सुरक्षा के लिए है।
कितना पैदल चलना पड़ता है?
अब ज़्यादातर सफ़र सड़क से होता है। पैदल चलना थोड़ा है: पार्वती कुंड के आसपास, चाहें तो गौरी कुंड तक, और दर्शन स्थलों पर। थकान दूरी से नहीं, ऊँचाई से होती है।
क्या बुज़ुर्ग माता-पिता यह यात्रा कर सकते हैं?
बहुत से बुज़ुर्ग करते हैं, डॉक्टर की मंज़ूरी, धीमी योजना और गुंजी में विश्राम दिवस के साथ। दिल या फेफड़ों की समस्या वाले पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
क्या यह कैलाश मानसरोवर जैसी ही यात्रा है?
नहीं। आदि कैलाश भारत के अंदर एक अलग पवित्र पर्वत है। कैलाश मानसरोवर तिब्बत (चीन) में है, जिसके लिए पासपोर्ट, चीनी वीज़ा या परमिट और बिल्कुल अलग योजना चाहिए। उसके लिए हमारा कैलाश मानसरोवर यात्रा पेज देखें।
हमारे साथ आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा की योजना बनाएँ
हम देहरादून में हैं और पूरी यात्रा की व्यवस्था करते हैं: घर से निकलने से पहले दस्तावेज़ों की सूची, धारचूला में परमिट में मदद, आरामदायक गाड़ी, गुंजी में ठहराव, और ॐ पर्वत, आदि कैलाश व पार्वती कुंड के दर्शन, आपके परिवार के अनुकूल गति से। पूरा कार्यक्रम हमारे आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा पेज पर देखें। तिथियों और कोटेशन के लिए इस पेज पर दिया एन्क्वायरी फ़ॉर्म भरें या हमें कॉल/WhatsApp करें (नंबर हमारे संपर्क पेज पर हैं)।
अंतिम जाँच: अक्टूबर 2026 — नियम हर सीज़न में बदलते हैं। परमिट की प्रक्रिया, खुलने की तिथियाँ और सड़क की स्थिति हर साल पिथौरागढ़ ज़िला प्रशासन तय करता है। यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।
