संक्षेप में: हरिद्वार कुंभ (अर्धकुंभ) 2027 का आयोजन 14 जनवरी से 20 अप्रैल 2027 तक निर्धारित है। दस मुख्य स्नान तिथियाँ घोषित हो चुकी हैं। तीन अमृत स्नान, जिनमें अखाड़े शोभायात्रा के साथ स्नान करते हैं, 6 मार्च (महाशिवरात्रि), 8 मार्च (सोमवती फाल्गुन अमावस्या) और 14 अप्रैल (मेष संक्रांति) को हैं। ये तिथियाँ नवंबर 2025 में अखाड़ा परिषद के साथ तय हुईं और अप्रैल 2026 में मेला प्रशासन ने इन्हें दोहराया।
2027 यात्रा सीज़न के लिए अपडेट (तथ्य अक्टूबर 2026 में जाँचे गए)
हरिद्वार हमारे घर जैसा है। हम देहरादून में हैं, हर की पैड़ी से लगभग एक घंटे की दूरी पर, और जिन परिवारों की हम सेवा करते हैं उनमें से बहुत से 2027 में कुंभ स्नान करना चाहेंगे। यह गाइड बताती है कि क्या पक्का हो चुका है, क्या अभी आना बाक़ी है, और बुज़ुर्गों व बच्चों के साथ सुरक्षित, बिना हड़बड़ी के स्नान की योजना कैसे बनाएँ।
ध्यान दें कि मेला अवधि की अंतिम आधिकारिक अधिसूचना और स्नान तिथियों में किसी भी बदलाव का अधिकार उत्तराखंड सरकार और मेला प्रशासन के पास है। कुछ भी बदलेगा तो हम यह पेज अपडेट करेंगे।
2027 में कुंभ है या अर्धकुंभ?
सही मायनों में 2027 में हरिद्वार में अर्धकुंभ है, जो 2021 के पूर्ण कुंभ के छह साल बाद आ रहा है। फिर भी उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि 2027 का मेला पूर्ण कुंभ जैसी भव्यता और पैमाने पर होगा, और सरकारी बयानों व समाचारों में “कुंभ 2027” और “अर्धकुंभ 2027” दोनों नाम चलते हैं। अखाड़ों ने, जिनके शोभायात्रा स्नान पहले शाही स्नान कहलाते थे और अब अमृत स्नान कहलाते हैं, राज्य के साथ स्नान का कैलेंडर तय कर लिया है, इसलिए 2027 के मेले में पूर्ण कुंभ की तरह अखाड़ों के अमृत स्नान होंगे।
एक यात्री के लिए नाम से बहुत फ़र्क़ नहीं पड़ता: यह ब्रह्मकुंड, हर की पैड़ी पर कुंभ स्नान है, जहाँ अखाड़े, संत और करोड़ों श्रद्धालु उपस्थित होंगे।
हरिद्वार कुंभ 2027 की स्नान तिथियाँ
| तिथि | दिन | पर्व | प्रकार |
|---|---|---|---|
| 14 जनवरी 2027 | गुरुवार | मकर संक्रांति | स्नान पर्व; मेला शुरू |
| 6 फ़रवरी 2027 | शनिवार | मौनी अमावस्या | स्नान पर्व |
| 11 फ़रवरी 2027 | गुरुवार | वसंत पंचमी | स्नान पर्व |
| 20 फ़रवरी 2027 | शनिवार | माघ पूर्णिमा | स्नान पर्व |
| 6 मार्च 2027 | शनिवार | महाशिवरात्रि | अमृत स्नान |
| 8 मार्च 2027 | सोमवार | फाल्गुन अमावस्या (सोमवती) | अमृत स्नान |
| 7 अप्रैल 2027 | बुधवार | नव संवत्सर (हिंदू नववर्ष) | स्नान पर्व |
| 14 अप्रैल 2027 | बुधवार | मेष संक्रांति (बैसाखी) | अमृत स्नान |
| 15 अप्रैल 2027 | गुरुवार | राम नवमी | स्नान पर्व |
| 20 अप्रैल 2027 | मंगलवार | चैत्र पूर्णिमा | स्नान पर्व; मेला समापन |
इन तिथियों की स्थिति: ये 28 नवंबर 2025 को हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और 13 अखाड़ों के साथ बैठक में तय हुईं। 14 अप्रैल 2026 को मेलाधिकारी ने यही दस तिथियाँ दोहराईं और 6 मार्च, 8 मार्च व 14 अप्रैल को अमृत स्नान बताया। कुछ समाचारों में चैत्र पूर्णिमा (20 अप्रैल) को चौथा अमृत स्नान बताया गया है; मेला प्रशासन के अप्रैल 2026 के बयान में तीन ही थे। 20 अप्रैल के लिए यात्रा तय करने से पहले अंतिम सरकारी अधिसूचना देख लें।
अमृत स्नान क्या है, और क्या उस दिन जाना चाहिए?
अमृत स्नान के दिन नागा संन्यासियों समेत साधुओं के अखाड़े तय क्रम और तय समय पर शोभायात्रा के साथ हर की पैड़ी पर स्नान करने जाते हैं। यह मन को गहराई से छूने वाला दृश्य है, और बहुत से श्रद्धालु मानते हैं कि संतों के स्नान के बाद गंगा विशेष रूप से पवित्र हो जाती है।
पर अमृत स्नान के दिन पूरे मेले के सबसे भीड़ वाले दिन भी होते हैं। इन बातों की उम्मीद रखें:
- अखाड़ों के स्नान के समय ब्रह्मकुंड और आसपास के घाट उनके लिए आरक्षित रहते हैं, और आम श्रद्धालुओं को दूसरे घाटों पर भेजा जाता है।
- पिछली रात से ही गाड़ियाँ बाहरी पार्किंग पर रोक दी जाती हैं, और तय एकतरफ़ा रास्तों पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
- हरिद्वार और आसपास के होटल पूरी तरह भरे रहते हैं और सबसे ऊँचे दाम पर।
- स्नान के बाद शहर से निकलने में बहुत लंबा इंतज़ार।
बुज़ुर्गों और बच्चों वाले परिवारों के लिए हमारी सलाह: कोई ऐसा सामान्य दिन चुनें जो मुख्य स्नान का दिन न हो, या जनवरी-फ़रवरी के शुरुआती स्नान पर्वों में से कोई, और सुबह जल्दी स्नान करें। हरिद्वार में गंगा मेले के हर दिन वही गंगा है।
कुंभ स्नान की योजना कैसे बनाएँ: क़दम-दर-क़दम
- पहले तिथि तय करें। तय करें कि अमृत स्नान चाहिए, कोई और स्नान पर्व, या कोई शांत दिन। फिर एक दिन पहले पहुँचने और बाद में एक अतिरिक्त दिन रखने की योजना बनाएँ।
- ठहराव जल्दी बुक करें। स्नान तिथियों के आसपास हरिद्वार, कनखल और ऋषिकेश के होटल महीनों पहले भर जाएँगे। सरकार ने मेले के लिए टेंट सिटी की घोषणा की है; उसका विवरण और बुकिंग का तरीक़ा समय के क़रीब घोषित होना चाहिए। देहरादून और ऋषिकेश अच्छे आधार हैं, बस स्नान वाले दिन जल्दी निकलें।
- आने-जाने की योजना बनाएँ। हरिद्वार जंक्शन मुख्य रेल नेटवर्क पर है, और बड़े स्नान दिनों के लिए आम तौर पर स्पेशल ट्रेनें घोषित होती हैं। निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून) लगभग 35–40 किमी दूर है। दिल्ली सड़क से लगभग 220 किमी है। भीड़ वाले दिनों में निजी गाड़ियाँ शहर के बाहर पार्किंग पर रोकी जाएँगी, जहाँ से शटल और पैदल जाना होगा।
- घाट चुनें। हर की पैड़ी (ब्रह्मकुंड) सबसे पवित्र है, पर भीड़ वाले दिनों में आरक्षित या कड़े नियंत्रण में रहती है। मेला क्षेत्र में गंगा के किनारे के दूसरे घाट भी स्नान के लिए उतने ही मान्य हैं।
- परिवार को तैयार करें। सबका फ़ोटो पहचान पत्र साथ रखें, हर बच्चे और बुज़ुर्ग की जेब में एक कार्ड पर फ़ोन नंबर लिखकर रखें, मिलने की एक जगह तय करें, और दवाइयाँ व पानी साथ रखें। कोई बिछड़ जाए तो आधिकारिक खोया-पाया केंद्रों की मदद लें।
- आधिकारिक निर्देश मानें। भीड़, यातायात और रास्तों की योजना उत्तराखंड पुलिस और मेला प्रशासन घोषित करते हैं। इन्हें मानें, भले ही पैदल ज़्यादा चलना पड़े।
2027 मेले के दौरान मौसम
| अवधि | मौसम | क्या साथ रखें |
|---|---|---|
| जनवरी | ठंडी सुबह और रातें; कोहरे से ट्रेनें देर हो सकती हैं | गर्म कपड़ों की परतें, शॉल, स्नान के बाद के लिए तौलिया और सूखे कपड़े |
| फ़रवरी | ठंडे, सुहावने दिन; सुबह जल्दी ठंड | हल्के ऊनी कपड़े |
| मार्च | सुहावना से गर्म | सूती कपड़े, टोपी, सुबह के लिए हल्की शॉल |
| अप्रैल | गर्म से तेज़ गर्म दोपहर | पानी, धूप से बचाव, ORS |
मेले के हर महीने में गंगा का पानी ठंडा रहता है, ख़ासकर जनवरी और फ़रवरी में। दिल या ब्लड प्रेशर की समस्या वाले बुज़ुर्ग छोटी, सावधानी भरी डुबकी लें, या घाट की सीढ़ियों पर लोटे से स्नान करें।
2027 के लिए क्या तैयारियाँ हो रही हैं?
2026 भर की ख़बरों में उन मुख्य कामों का ज़िक्र है जिन्हें राज्य ने मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है:
- हर की पैड़ी समेत घाटों का पुनर्निर्माण और सुधार, स्नान की बेहतर सुविधाओं के साथ।
- मेला क्षेत्र के हर पुल का सुरक्षा ऑडिट, और सूखी नदी व मायापुर एस्केप चैनल पर दो नए पुलों की ख़बर।
- मेले के लिए दूसरा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, CCTV, ड्रोन और जल पुलिस।
- टेंट सिटी, अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और मोबाइल मेडिकल टीमें; सफ़ाई और पेयजल की योजनाएँ।
- पार्किंग, यातायात और भीड़ नियंत्रण की अलग योजनाएँ, जिनके लिए तैयारियाँ पूरी करने का लक्ष्य अक्टूबर 2026 रखा गया।
2027 के लिए श्रद्धालुओं के नियम, जैसे कोई रजिस्ट्रेशन, पास व्यवस्था या रूट प्लान, अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित नहीं हुए थे। प्रकाशित होते ही हम उन्हें यहाँ जोड़ेंगे।
कुंभ के दौरान पूजा-अनुष्ठान और दर्शन
- ब्रह्मकुंड में स्नान: मुख्य कर्म; डुबकी लें, सूर्य को गंगाजल अर्पित करें और सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
- हर की पैड़ी की गंगा आरती: हर शाम होती है; मेले में बहुत भीड़ रहती है, इसलिए जल्दी जगह ले लें। हमारी गाइड हर की पैड़ी गंगा आरती का समय और कहाँ बैठें पढ़ें।
- पिंडदान, तर्पण और अस्थि विसर्जन: बहुत से परिवार कुंभ के साथ कुशावर्त और नारायणी शिला पर पितरों के लिए कर्म भी करते हैं। किसी जाने-पहचाने पंडित को पहले से तय कर लें।
- अखाड़ा दर्शन और सत्संग: पूरे मेले में अखाड़ों के शिविरों और संतों के पंडालों में कथा और प्रवचन होते हैं।
- मनसा देवी और चंडी देवी: रोपवे पर बहुत भीड़ रहेगी; जल्दी जाएँ या स्नान रहित दिन में।
कुंभ के साथ चार धाम 2027
मेला 20 अप्रैल 2027 को समाप्त होगा, और चार धाम के कपाट आम तौर पर अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में खुलते हैं। जो परिवार दोनों चाहते हैं, वे अप्रैल के मध्य में कुंभ स्नान करके, कपाट खुलने की तिथियाँ घोषित होने पर चार धाम यात्रा पर आगे बढ़ सकते हैं। केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि परंपरा से महाशिवरात्रि पर घोषित होती है, जो 2027 में पहला अमृत स्नान भी है। संयुक्त यात्रा की योजना बनाने से पहले हमारी चार धाम रजिस्ट्रेशन गाइड पढ़ें।
हम क्या व्यवस्था करते हैं
अपने देहरादून आधार से हम आपकी चुनी तिथियों के अनुसार कुंभ स्नान की व्यवस्था करते हैं: हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून में ठहराव, आधिकारिक रूट प्लान के भीतर स्थानीय परिवहन, सुबह जल्दी घाट तक साथ, और पूजा, पिंडदान या अस्थि विसर्जन के लिए पंडित। हमारी हरिद्वार ऋषिकेश यात्रा और दिल्ली–हरिद्वार पिंडदान यात्रा (₹25,000 से) किसी स्नान तिथि के आसपास बनाई जा सकती हैं, और उसके बाद हरिद्वार से चार धाम यात्रा जोड़ी जा सकती है। जो परिवार यात्रा नहीं कर सकते, वे ऑनलाइन हर की पैड़ी पर गंगा आरती का संकल्प करा सकते हैं। 2027 में ठहरने की जगह सबसे कम पड़ेगी, इसलिए जल्दी इस पेज पर दिया एन्क्वायरी फ़ॉर्म भरें या हमें कॉल/WhatsApp करें (नंबर हमारे संपर्क पेज पर हैं)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हरिद्वार कुंभ 2027 कब है?
हरिद्वार कुंभ (अर्धकुंभ) 14 जनवरी 2027, मकर संक्रांति से 20 अप्रैल 2027, चैत्र पूर्णिमा तक निर्धारित है। ये तिथियाँ नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री और अखाड़ा परिषद के बीच तय हुईं और अप्रैल 2026 में मेला प्रशासन ने दोहराईं। मेला अवधि की अंतिम सरकारी अधिसूचना में और विवरण आ सकता है, इसलिए बुकिंग से पहले उसे देख लें।
हरिद्वार कुंभ 2027 में अमृत स्नान कब हैं?
मेला प्रशासन के अप्रैल 2026 के बयान के अनुसार तीन अमृत स्नान 6 मार्च 2027 (महाशिवरात्रि), 8 मार्च 2027 (सोमवती फाल्गुन अमावस्या) और 14 अप्रैल 2027 (मेष संक्रांति) को हैं। कुछ समाचारों में 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) को भी अमृत स्नान बताया गया। इन दिनों अखाड़े शोभायात्रा के साथ हर की पैड़ी पर स्नान करते हैं।
हरिद्वार में 2027 में कुंभ है या अर्धकुंभ?
यह अर्धकुंभ है, जो हरिद्वार में 2021 के पूर्ण कुंभ के छह साल बाद है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि यह पूर्ण कुंभ के पैमाने पर होगा, और सरकारी बयानों व मीडिया में दोनों नाम चलते हैं। मुख्य दिनों पर अखाड़े शोभायात्रा के साथ अमृत स्नान भी करेंगे।
बुज़ुर्गों के लिए कुंभ स्नान का सबसे अच्छा दिन कौन-सा है?
अगर चलने-फिरने या स्वास्थ्य की चिंता है, तो तीनों अमृत स्नान के दिनों से बचें, क्योंकि सड़कें बंद रहती हैं और पैदल लंबा चलना पड़ता है। कोई सामान्य दिन जो स्नान पर्व न हो, या वसंत पंचमी जैसा शुरुआती स्नान पर्व आसान रहता है। सुबह जल्दी स्नान करें, रेलिंग और ज़ंजीर वाला घाट चुनें, और परिवार का कोई सदस्य पूरे समय बुज़ुर्ग के साथ रहे।
कुंभ के दौरान हरिद्वार कैसे पहुँचें?
ट्रेन से हरिद्वार जंक्शन, जहाँ स्नान दिनों के लिए आम तौर पर स्पेशल ट्रेनें घोषित होती हैं; हवाई जहाज़ से देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे तक, जो लगभग 35–40 किमी दूर है; या सड़क से दिल्ली से, लगभग 220 किमी। भीड़ वाले दिनों में निजी गाड़ियाँ बाहरी पार्किंग पर रोकी जाएँगी, इसलिए शटल लेने और आख़िरी कुछ किलोमीटर पैदल चलने के लिए तैयार रहें।
हरिद्वार कुंभ 2027 के लिए कहाँ ठहरें?
हरिद्वार और कनखल घाटों के सबसे पास हैं, पर स्नान तिथियों पर सबसे पहले भरेंगे और सबसे महँगे होंगे। ऋषिकेश और देहरादून व्यावहारिक विकल्प हैं, बस सुबह जल्दी निकलना होगा। सरकार ने मेले के लिए टेंट सिटी की घोषणा की है; बुकिंग का विवरण समय के क़रीब आने की उम्मीद है। जल्दी बुक करें और रद्दीकरण की शर्तें लिखित में पक्की करें।
क्या कुंभ स्नान के लिए रजिस्ट्रेशन या पास चाहिए?
अक्टूबर 2026 तक हरिद्वार 2027 के लिए आम श्रद्धालुओं हेतु कोई रजिस्ट्रेशन या पास व्यवस्था घोषित नहीं हुई थी। जनवरी से पहले मेला प्रशासन रूट प्लान, पार्किंग पास या ऐप आधारित जानकारी ला सकता है। अपनी तिथि के क़रीब उत्तराखंड सरकार और पुलिस की घोषणाएँ देखें, और परिवार के हर सदस्य का फ़ोटो पहचान पत्र साथ रखें।
