केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में मंदाकिनी नदी के उद्गम क्षेत्र के पास, लगभग 3,583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। यहाँ पहुँचने के लिए सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक वाहन से और फिर लगभग 16–18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी होती है; जो चल नहीं सकते उनके लिए घोड़ा, पालकी, पिट्ठू और हेलीकॉप्टर का विकल्प है। कपाट हर साल अप्रैल–मई में खुलते हैं और भैया दूज पर बंद होते हैं; 2027 की तिथि घोषित होने पर यहाँ जोड़ी जाएगी।
देहरादून या हरिद्वार से केदारनाथ यात्रा में कितने दिन लगेंगे, यह इस पर निर्भर है कि आप पैदल जाते हैं या हेलीकॉप्टर से, और साथ में कौन-से धाम जोड़ते हैं। हर पैकेज की अवधि नीचे पैकेज कार्ड में दी गई है।
केदारनाथ यात्रा का महत्व
केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इनमें सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित है। यह पंच केदार में पहला धाम भी है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव से क्षमा माँगने हिमालय आए, और शिव ने महिष रूप में यहाँ दर्शन दिए; इसीलिए यहाँ शिवलिंग पीठ के आकार की शिला के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर के पीछे आदि शंकराचार्य का समाधि स्थल है, और पास की पहाड़ी पर भैरवनाथ मंदिर है, जिन्हें केदार क्षेत्र का रक्षक माना जाता है। मंदिर के पीछे स्थित भीम शिला भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। बहुत-से यात्री यहाँ रुद्राभिषेक या विशेष पूजा का संकल्प लेकर आते हैं।
कपाट कब खुलते और बंद होते हैं
2026 में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुले थे और 11 नवंबर 2026 को भैया दूज के दिन सुबह शीतकाल के लिए बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की उत्सव डोली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर ले जाई जाती है, जहाँ सर्दियों भर पूजा होती है। जो श्रद्धालु शीतकाल में दर्शन करना चाहते हैं, वे ऊखीमठ जा सकते हैं।
2027: कपाट खुलने की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। परंपरा के अनुसार यह तिथि महाशिवरात्रि के दिन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग देखकर तय की जाती है। घोषणा होते ही हम यहाँ अपडेट करेंगे।
कब जाएँ
- कपाट खुलने से जून तक: मौसम अच्छा पर भीड़ सबसे ज़्यादा। पैदल मार्ग, ठहराव और हेलीकॉप्टर — सबकी बुकिंग जल्दी करें।
- जुलाई–अगस्त: मानसून में पैदल मार्ग पर फिसलन, भूस्खलन और रास्ता बंद होने का ख़तरा रहता है। इस अवधि में हेलीकॉप्टर सेवा भी आम तौर पर रोक दी जाती है।
- सितंबर से कपाट बंद होने तक: साफ़ आसमान और अपेक्षाकृत कम भीड़। रातें बहुत ठंडी होती हैं और अक्टूबर–नवंबर में बर्फ़बारी भी हो सकती है।
कैसे पहुँचें: देहरादून से केदारनाथ का रूट
- देहरादून / हरिद्वार से ऋषिकेश: यात्रा का पहला पड़ाव।
- ऋषिकेश से देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग: देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा का संगम होकर गंगा बनती है, और रुद्रप्रयाग में अलकनंदा व मंदाकिनी का संगम है।
- रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी / सीतापुर / सोनप्रयाग: मंदाकिनी घाटी में यही रात्रि विश्राम के मुख्य स्थान हैं। गुप्तकाशी में विश्वनाथ मंदिर के दर्शन भी किए जाते हैं।
- सोनप्रयाग से गौरीकुंड: निजी वाहन सोनप्रयाग तक ही जाते हैं; आगे गौरीकुंड तक शटल वाहन चलते हैं। गौरीकुंड में गर्म जल कुंड और माँ गौरी का मंदिर है।
- गौरीकुंड से केदारनाथ: लगभग 16–18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई, जो जंगलचट्टी, भीमबली और लिनचोली होते हुए केदारनाथ बेस कैंप और फिर मंदिर तक पहुँचती है।
निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट है और निकटतम बड़े रेलवे स्टेशन हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून हैं।
रजिस्ट्रेशन
केदारनाथ यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार का चार धाम रजिस्ट्रेशन हर यात्री के लिए अनिवार्य है। यह आधिकारिक पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in या टूरिस्ट केयर उत्तराखंड ऐप पर निःशुल्क होता है। हर यात्री का पहचान पत्र, फ़ोटो और दर्शन की संभावित तिथि भरनी होती है। रजिस्ट्रेशन का पत्र या QR कोड रास्ते में और धाम पर जाँचा जाता है, इसलिए उसे फ़ोन और काग़ज़ — दोनों रूप में रखें। हेलीकॉप्टर टिकट बुक करने के लिए भी यही रजिस्ट्रेशन नंबर ज़रूरी है।
पैदल मार्ग: क्या उम्मीद करें
गौरीकुंड से केदारनाथ का रास्ता पक्का बना हुआ है, पर लगातार चढ़ाई वाला है। स्वस्थ व्यक्ति को इसमें आम तौर पर पूरा दिन लग जाता है, इसलिए सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहता है। रास्ते में पानी, भोजन, विश्राम स्थल और स्वास्थ्य जाँच केंद्र मिलते हैं।
- घोड़ा-खच्चर: केवल पंजीकृत काउंटर से लें और रसीद संभालकर रखें।
- पालकी (डंडी-कंडी) और पिट्ठू: बुज़ुर्गों और कम चल पाने वाले यात्रियों के लिए उपयोगी; ये भी अधिकृत काउंटर से ही लें।
- रात्रि विश्राम: अधिकतर यात्री दर्शन के लिए एक रात केदारनाथ में रुकते हैं, ताकि सुबह के दर्शन और शाम की आरती दोनों मिल सकें। अगले दिन नीचे उतरते हैं।
हेलीकॉप्टर से केदारनाथ
केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा मंदाकिनी घाटी के गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी जैसे हेलीपैड से चलती है। उड़ान कुछ ही मिनटों की होती है, जिससे पैदल चढ़ाई का पूरा दिन बच जाता है।
- बुकिंग केवल IRCTC के आधिकारिक पोर्टल heliyatra.irctc.co.in पर होती है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी अन्य लिंक या व्यक्ति के माध्यम से टिकट न लें — ऐसे धोखे के मामले सामने आते रहे हैं।
- टिकट बुक करने से पहले चार धाम रजिस्ट्रेशन पूरा होना चाहिए, और हर यात्री का नाम उसके पहचान पत्र से मिलना चाहिए।
- 2026 में सेवा दो चरणों में चली — कपाट खुलने से जून के मध्य तक, और फिर मानसून के बाद सितंबर के मध्य से। बुकिंग खुलते ही टिकट जल्दी भर जाते हैं।
- ख़राब मौसम में उड़ानें रुक सकती हैं। इसलिए यात्रा में कम से कम एक अतिरिक्त दिन रखें।
जिनके पास समय बहुत कम है, उनके लिए देहरादून से हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ और बद्रीनाथ — दोनों धामों के दर्शन की यात्रा भी होती है।
वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों के लिए सलाह
- यात्रा से पहले डॉक्टर से जाँच करवाएँ, विशेषकर 55 वर्ष से अधिक उम्र या हृदय रोग, दमा, मधुमेह या उच्च रक्तचाप होने पर।
- मैदान से सीधे केदारनाथ न चढ़ें। गुप्तकाशी या सोनप्रयाग क्षेत्र में एक रात रुककर शरीर को ऊँचाई के अनुसार ढलने दें।
- चढ़ाई धीरे-धीरे करें, बीच-बीच में आराम करें और पानी पीते रहें।
- सिरदर्द, चक्कर, उल्टी या साँस फूलने को हल्के में न लें। रास्ते के स्वास्थ्य केंद्र पर जाँच करवाएँ और ज़रूरत हो तो नीचे उतरें।
- बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए गर्म कपड़ों का एक अतिरिक्त सेट रखें — केदारनाथ में गर्मियों की रातें भी ठंडी होती हैं।
- मंदिर परिसर में मोबाइल फ़ोन और फ़ोटो-वीडियो पर रोक है। फ़ोन बाहर जमा करें और दर्शन शांत मन से करें।
ज़रूरी दस्तावेज़ और सामान
- हर यात्री का मूल पहचान पत्र और चार धाम रजिस्ट्रेशन की प्रति; हेलीकॉप्टर यात्रा हो तो टिकट की प्रति।
- थर्मल, ऊनी टोपी, दस्ताने, गर्म जैकेट और ऊनी मोज़े।
- रेनकोट या पोंचो — पहाड़ में मौसम कभी भी बदल सकता है।
- अच्छी पकड़ वाले, पहले से पहने हुए जूते; नए जूते चढ़ाई में छाले कर देते हैं।
- नियमित दवाइयाँ, प्राथमिक उपचार का सामान, टॉर्च, पानी की बोतल और हल्का सूखा नाश्ता।
- पूजा के लिए गोत्र और परिवार के सदस्यों के नाम, ताकि संकल्प सही ढंग से हो सके।
हम क्या व्यवस्था करते हैं
देहरादून से हम केदारनाथ यात्रा की पूरी व्यवस्था करते हैं: चार धाम रजिस्ट्रेशन में मदद, पहाड़ी रास्तों के अनुभवी चालक के साथ वाहन, मंदाकिनी घाटी और ज़रूरत हो तो केदारनाथ में ठहराव, सात्विक भोजन, घोड़ा-पालकी के लिए मार्गदर्शन, और हेलीकॉप्टर बुकिंग के समय पर सही सलाह। जो परिवार केदारनाथ के साथ तुंगनाथ या बद्रीनाथ जोड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम पूरा रूट उसी हिसाब से बनाते हैं। मौसम या रास्ता बंद होने पर योजना तुरंत बदली जाती है, ताकि दर्शन का संकल्प पूरा हो।
हमारे यात्रा पैकेज
केवल केदारनाथ, केदारनाथ के साथ तुंगनाथ, या केदारनाथ–बद्रीनाथ दो धाम — अपनी सुविधा और समय के अनुसार यात्रा चुनें।
- 3N / 4D
Kedarnath Yatra
Dehradun → Rishikesh → Devprayag → Rudraprayag → Guptkashi → Sonprayag → Gaurikund → Ked…
- Darshan at Kedarnath, the highest of the 12 Jyotirlingas
- Evening aarti and early-morning darshan at the Dham
- Start and end in Dehradun, with a night halt at Guptkashi
Price on request
- 4N / 5D
Kedarnath Tungnath Yatra
Haridwar → Devprayag → Rudraprayag → Guptkashi → Sonprayag → Gaurikund → Kedarnath → Gau…
- Darshan at Kedarnath Jyotirlinga with a night at the shrine
- Tungnath climb from Chopta, with optional Chandrashila summit
- Haridwar pickup and drop, private vehicle and daily breakfast and dinner
- 5N / 6D
Do Dham Yatra by Road – Kedarnath & Badrinath from Haridwar
Haridwar → Devprayag → Rudraprayag → Guptkashi → Sonprayag → Gaurikund → Kedarnath (trek…
- Overnight stay at Kedarnath for evening aarti and early-morning darshan
- Badrinath darshan with Tapt Kund dip and a visit to Mana village
- Private vehicle from Haridwar and back with breakfast and dinner daily
- 0N / 1D
Same Day Do Dham Yatra by Helicopter: Dehradun to Kedarnath and Badrinath
Dehradun (Sahastradhara) → Sersi → Kedarnath → Sersi → Badrinath → Dehradun (Sahastradha…
- Kedarnath and Badrinath darshan in a single morning from Dehradun
- No trekking: the temple is a few minutes' walk at Kedarnath and a short drive at Badrinath
- Priority darshan and our ground team at every helipad and temple
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
केदारनाथ के कपाट 2027 में कब खुलेंगे?
2027 की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। परंपरा के अनुसार यह तिथि महाशिवरात्रि पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में तय होती है। 2026 में कपाट 22 अप्रैल को खुले और 11 नवंबर को भैया दूज पर बंद होंगे।
गौरीकुंड से केदारनाथ कितनी दूर है?
गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16–18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई है। स्वस्थ यात्री को आम तौर पर इसमें पूरा दिन लगता है, इसलिए सुबह जल्दी निकलना अच्छा रहता है।
केदारनाथ हेलीकॉप्टर की बुकिंग कहाँ से करें?
केदारनाथ हेलीकॉप्टर की बुकिंग केवल IRCTC के आधिकारिक पोर्टल heliyatra.irctc.co.in पर होती है। इसके लिए पहले चार धाम रजिस्ट्रेशन पूरा होना ज़रूरी है। किसी अन्य लिंक या व्यक्ति से टिकट न लें।
केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर कहाँ से उड़ते हैं?
मंदाकिनी घाटी में गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी जैसे हेलीपैड से। ख़राब मौसम में उड़ानें रुक सकती हैं, इसलिए यात्रा में एक अतिरिक्त दिन रखना समझदारी है।
क्या केदारनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?
हाँ। हर यात्री का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड सरकार के पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in या टूरिस्ट केयर उत्तराखंड ऐप पर अनिवार्य और निःशुल्क है।
क्या बुज़ुर्ग केदारनाथ यात्रा कर सकते हैं?
हाँ। बुज़ुर्ग यात्री पालकी, पिट्ठू या हेलीकॉप्टर से दर्शन कर सकते हैं। यात्रा से पहले डॉक्टर से जाँच करवाएँ और ऊँचाई पर पहुँचने से पहले गुप्तकाशी या सोनप्रयाग क्षेत्र में एक रात रुकें।
केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद दर्शन कहाँ होते हैं?
शीतकाल में बाबा केदार की पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। कपाट बंद होने के बाद उत्सव डोली वहीं ले जाई जाती है।
केदारनाथ यात्रा बुक करने के लिए क्या करें?
इस पृष्ठ के नीचे दिया फ़ॉर्म भरें — हमारी टीम आपको कॉल करेगी और पैदल, पालकी या हेलीकॉप्टर में से आपके परिवार के लिए सही विकल्प बताएगी।
यात्रा की योजना बनाएँ
केदारनाथ यात्रा में ठहराव और हेलीकॉप्टर की बुकिंग जल्दी भरती है, इसलिए योजना पहले बनाना अच्छा है। अपनी तिथि, यात्रियों की संख्या और पैदल या हेलीकॉप्टर की पसंद बताइए — नीचे फ़ॉर्म भरें, हमारी टीम आपको कॉल करेगी।
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