• Char Dham Yatra 2027 enquiries open
  • Kedarnath registration help for every yatri
  • Adi Kailash & Om Parvat 2027 batches — enquire early
  • Enquire online and we call you back
Menu

आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा 2027: परमिट, रूट और पैकेज

आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले की व्यास घाटी में, भारत-तिब्बत सीमा के पास होने वाली शिव-तीर्थ यात्रा है, जिसमें ज्योलिंगकांग (लगभग 4,420 मीटर) से आदि कैलाश और पार्वती कुंड के दर्शन, तथा नाभीढांग (लगभग 4,300 मीटर) से ॐ पर्वत के दर्शन होते हैं। इसके लिए धारचूला से इनर लाइन परमिट (ILP) अनिवार्य है और यात्रा आम तौर पर मई-जून और सितंबर से नवंबर के बीच होती है, जब सड़क खुली रहती है। 2027 के लिए परमिट शुरू होने की तिथि घोषित होने पर हम यहाँ अपडेट करेंगे; सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें पासपोर्ट या वीज़ा नहीं लगता — यह पूरी यात्रा भारत की धरती पर होती है।

आदि कैलाश और ॐ पर्वत का महत्व

आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है। इसका आकार तिब्बत के कैलाश पर्वत से मिलता-जुलता है और मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का यह भी एक निवास रहा है। पर्वत के नीचे स्थित पार्वती कुंड (पार्वती सरोवर) के जल में आदि कैलाश का प्रतिबिंब दिखता है — यह दृश्य हर यात्री के मन में बस जाता है। पास ही गौरी कुंड और प्राचीन शिव-पार्वती मंदिर भी है।

ॐ पर्वत की विशेषता है कि उसकी चट्टानों पर जमी बर्फ़ प्राकृतिक रूप से “ॐ” के आकार में दिखाई देती है। श्रद्धालु इसे शिव की प्रत्यक्ष उपस्थिति मानते हैं। आदि कैलाश यात्रा 1981 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ-साथ होती आई है, और 12 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद इसमें श्रद्धालुओं की संख्या तेज़ी से बढ़ी। 2026 में यात्रा शुरू होने के दो महीने के भीतर ही 52,000 से अधिक यात्री आदि कैलाश और ॐ पर्वत के दर्शन कर चुके थे।

कब जाएँ — 2026 का अनुभव और 2027 की योजना

यह क्षेत्र सर्दियों में बर्फ़ से ढका रहता है और सड़क बंद हो जाती है, इसलिए यात्रा दो चरणों में होती है:

  • पहला चरण (गर्मी): 2026 में यात्रा 1 मई से शुरू हुई। मई-जून में मौसम साफ़ रहता है और सबसे अधिक भीड़ इसी समय होती है।
  • मानसून में रोक: 2026 में भूस्खलन के ख़तरे के कारण पिथौरागढ़ प्रशासन ने 2 जुलाई से परमिट देना बंद किया। जुलाई-अगस्त में धारचूला-गुंजी मार्ग पर भूस्खलन आम है।
  • दूसरा चरण (शरद): 2026 में दूसरा चरण 15 सितंबर से होना था, पर धारचूला-गुंजी मार्ग पर कुलागाड़ के पास बेली ब्रिज बह जाने से यह 20 सितंबर से शुरू हुआ। यह चरण नवंबर तक या ऊँचाई पर बर्फ़बारी शुरू होने तक चलता है।
  • विशेष सूचना: 19 से 26 अक्टूबर 2026 तक आदि कैलाश परिक्रमा रन के कारण आम यात्रियों को इनर लाइन परमिट नहीं दिए गए।
  • 2027: परमिट शुरू होने की तिथि घोषित होने पर यहाँ जोड़ी जाएगी। सामान्य रूप से मई-जून और सितंबर-अक्टूबर सबसे अच्छे महीने माने जाते हैं।

रूट — देहरादून से आदि कैलाश कैसे पहुँचें

आदि कैलाश कुमाऊँ के सुदूर पूर्व में है। देहरादून से जाने वाले यात्री आम तौर पर हल्द्वानी-काठगोदाम होकर पहाड़ों में प्रवेश करते हैं। मुख्य पड़ाव:

देहरादून → हल्द्वानी / काठगोदाम → (जागेश्वर धाम) → पिथौरागढ़ → धारचूला → तवाघाट → मालपा → बूँदी → गुंजी → कुटी → ज्योलिंगकांग (आदि कैलाश) | गुंजी → नाभी → नाभीढांग (ॐ पर्वत)

  • धारचूला (लगभग 915 मीटर): काली नदी के किनारे बसा सीमांत क़स्बा, जहाँ परमिट बनते हैं। नदी के उस पार नेपाल दिखता है।
  • गुंजी (लगभग 3,200 मीटर): यात्रा का मुख्य पड़ाव। यहाँ रुककर शरीर को ऊँचाई के अनुकूल बनाया जाता है और स्वास्थ्य जाँच भी होती है। धारचूला से गुंजी लगभग 75–90 किलोमीटर है, जिसमें 4×4 गाड़ी से 5–6 घंटे लगते हैं।
  • ज्योलिंगकांग: गुंजी से कुटी होते हुए यहाँ पहुँचते हैं। यहाँ से पार्वती कुंड लगभग 1 किलोमीटर पैदल है और वहाँ से गौरी कुंड लगभग 2 किलोमीटर।
  • नाभीढांग: गुंजी से लगभग 20 किलोमीटर, जहाँ से ॐ पर्वत के दर्शन होते हैं।

रास्ते में जागेश्वर धाम (प्राचीन शिव मंदिर समूह) और लौटते समय पाताल भुवनेश्वर गुफा के दर्शन भी जोड़े जा सकते हैं। पिथौरागढ़ के बाद का रास्ता संकरा और कच्चा-पक्का है; गुंजी से आगे केवल स्थानीय 4×4 गाड़ियाँ ही उपयुक्त हैं।

इनर लाइन परमिट (ILP) — कैसे बनता है

सीमा क्षेत्र होने के कारण गुंजी, नाभी, कुटी, ज्योलिंगकांग और ॐ पर्वत क्षेत्र में प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट ज़रूरी है। आदि कैलाश और ॐ पर्वत दोनों एक ही परमिट में आ जाते हैं।

  • कहाँ बनता है: उप-ज़िलाधिकारी (SDM) कार्यालय, धारचूला। ऑनलाइन पूर्व-पंजीकरण की सुविधा भी दी जाती है, पर परमिट लेने के लिए धारचूला में उपस्थित होना पड़ता है।
  • पहचान पत्र: आधार, वोटर आईडी या पासपोर्ट जैसा सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र।
  • पता प्रमाण और पासपोर्ट आकार की फ़ोटो।
  • स्वास्थ्य प्रमाणपत्र: डॉक्टर द्वारा जारी फ़िटनेस प्रमाणपत्र।
  • पुलिस सत्यापन: अपने क्षेत्र के थाने से सत्यापन प्रमाणपत्र (हाल का होना चाहिए)।
  • आपातकालीन संपर्क का विवरण; कुछ मामलों में शपथ-पत्र भी मांगा जाता है।

परमिट आपकी स्वीकृत यात्रा अवधि के लिए ही मान्य होता है और किसी दूसरे के नाम पर नहीं चल सकता। यह यात्रा केवल भारतीय नागरिकों के लिए है। हमारे यात्रियों के दस्तावेज़ पहले से जाँचकर हम धारचूला में परमिट की प्रक्रिया में साथ रहते हैं, ताकि एक दिन भी व्यर्थ न जाए।

सड़क मार्ग, हेलीकॉप्टर या हवाई दर्शन

  • सड़क मार्ग: सबसे प्रचलित तरीका। धीरे-धीरे ऊँचाई बढ़ने से शरीर को अनुकूल होने का समय मिलता है और रास्ते में व्यास घाटी के गाँव, काली नदी और हिमालय के दृश्य देखने को मिलते हैं।
  • हेलीकॉप्टर से: उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और कुमाऊँ मंडल विकास निगम (KMVN) के सहयोग से पिथौरागढ़ से गुंजी तक हेलीकॉप्टर सेवा चलाई जाती है। गुंजी में एक रात रुककर ज्योलिंगकांग और नाभीढांग तक आगे की यात्रा होती है। यह कम दिनों में यात्रा का विकल्प है, पर सीधे ऊँचाई पर पहुँचने से शरीर पर दबाव भी अधिक पड़ता है।
  • हवाई दर्शन: पिथौरागढ़ से विशेष उड़ान द्वारा आदि कैलाश, ॐ पर्वत और व्यास घाटी के ऊपर से दर्शन — उन यात्रियों के लिए जो ऊँचाई पर रात नहीं रुक सकते। उड़ान केवल साफ़ मौसम में होती है।

वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों के लिए सलाह

  • ऊँचाई सबसे बड़ी चुनौती है: ज्योलिंगकांग 4,400 मीटर से ऊपर है। गुंजी में रुककर अनुकूलन करना ज़रूरी है — जल्दबाज़ी न करें।
  • पहले से डॉक्टरी जाँच: हृदय, रक्तचाप या साँस की बीमारी हो तो डॉक्टर की स्पष्ट अनुमति के बाद ही संकल्प लें।
  • लंबा सड़क सफ़र: पिथौरागढ़-धारचूला-गुंजी का रास्ता थकाने वाला है। कमर या घुटने की तकलीफ़ वाले यात्री कुशन और ज़रूरी सहारा साथ रखें।
  • पार्वती कुंड तक पैदल: ज्योलिंगकांग से कुंड तक छोटी पर ऊँचाई वाली चढ़ाई है। धीरे चलें, बीच-बीच में रुकें।
  • मौसम और सड़क: भूस्खलन से रास्ता बंद हो सकता है, इसलिए वापसी के बाद तुरंत ज़रूरी काम या ट्रेन-फ़्लाइट न रखें।

ज़रूरी दस्तावेज़ और सामान

  • सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र (मूल और कई फ़ोटोकॉपी), पता प्रमाण, पासपोर्ट आकार की फ़ोटो
  • स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र
  • डाउन जैकेट, थर्मल, ऊनी टोपी, दस्ताने, ऊनी मोज़े — सितंबर-अक्टूबर में रातें बहुत ठंडी होती हैं
  • मज़बूत जूते, रेनकोट, धूप का चश्मा, सनस्क्रीन
  • नियमित दवाइयाँ, प्राथमिक उपचार, पानी की बोतल
  • पर्याप्त नकदी — गुंजी से आगे मोबाइल नेटवर्क और ऑनलाइन भुगतान पर भरोसा न करें
  • पूजा सामग्री और पार्वती कुंड का जल लाने के लिए छोटा पात्र

हम क्या व्यवस्था करते हैं

हम देहरादून से यात्रा आयोजन करते हैं और कुमाऊँ के सीमांत मार्गों की ताज़ा स्थिति पर लगातार नज़र रखते हैं। आदि कैलाश यात्रा में हमारी व्यवस्था में आम तौर पर ये बातें रहती हैं (हर पैकेज का विवरण उसके पेज पर है):

  • देहरादून या दिल्ली से पिथौरागढ़-धारचूला तक वाहन, और गुंजी से आगे स्थानीय 4×4 गाड़ियाँ
  • इनर लाइन परमिट के दस्तावेज़ों की पहले से जाँच और धारचूला में प्रक्रिया में सहायता
  • रास्ते और गुंजी क्षेत्र में ठहरने की व्यवस्था
  • ऊँचाई के अनुसार दिन-प्रतिदिन की योजना, ताकि अनुकूलन का पूरा समय मिले
  • सड़क बंद होने या मौसम बिगड़ने पर तुरंत वैकल्पिक योजना
  • पार्वती कुंड पर पूजा और ॐ पर्वत दर्शन के लिए मार्गदर्शन

हमारे यात्रा पैकेज

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आदि कैलाश यात्रा 2027 कब शुरू होगी?

2027 के लिए इनर लाइन परमिट शुरू होने की तिथि घोषित होने पर हम यहाँ अपडेट करेंगे। तुलना के लिए, 2026 में पहला चरण 1 मई से और दूसरा चरण 20 सितंबर से शुरू हुआ था, जो नवंबर में बर्फ़बारी तक चलता है।

क्या आदि कैलाश यात्रा के लिए पासपोर्ट चाहिए?

नहीं। आदि कैलाश और ॐ पर्वत भारत में ही हैं, इसलिए पासपोर्ट या वीज़ा नहीं लगता। केवल धारचूला से इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है, जो भारतीय नागरिकों को मिलता है।

इनर लाइन परमिट के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र, पता प्रमाण, पासपोर्ट आकार की फ़ोटो, डॉक्टर का स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र और आपातकालीन संपर्क का विवरण। परमिट SDM कार्यालय, धारचूला से जारी होता है।

आदि कैलाश और ॐ पर्वत कितनी ऊँचाई पर हैं?

आदि कैलाश के दर्शन ज्योलिंगकांग से होते हैं, जो लगभग 4,420 मीटर ऊँचाई पर है। ॐ पर्वत के दर्शन नाभीढांग से होते हैं, जो लगभग 4,300 मीटर पर है। मुख्य पड़ाव गुंजी लगभग 3,200 मीटर पर है।

आदि कैलाश यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

मई-जून और सितंबर-अक्टूबर सबसे अच्छे महीने हैं। जुलाई-अगस्त में मानसून के कारण भूस्खलन होता है और प्रशासन परमिट रोक भी देता है, जैसा 2026 में 2 जुलाई से हुआ।

क्या आदि कैलाश हेलीकॉप्टर से जा सकते हैं?

हाँ, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और KMVN के सहयोग से पिथौरागढ़ से गुंजी तक हेलीकॉप्टर सेवा चलती है, जिसमें गुंजी में रात रुककर ज्योलिंगकांग और नाभीढांग जाते हैं। जो ऊँचाई पर नहीं रुक सकते, उनके लिए पिथौरागढ़ से हवाई दर्शन उड़ान का विकल्प भी है।

क्या बुज़ुर्ग आदि कैलाश यात्रा कर सकते हैं?

स्वस्थ बुज़ुर्ग यह यात्रा कर सकते हैं, क्योंकि ज़्यादातर रास्ता गाड़ी से है। पर ऊँचाई 4,400 मीटर से अधिक है, इसलिए डॉक्टर की अनुमति, गुंजी में अनुकूलन और धीमी गति ज़रूरी है।

यात्रा की योजना बनाएँ

आदि कैलाश यात्रा में परमिट, मौसम और सड़क की स्थिति — तीनों का ध्यान एक साथ रखना पड़ता है। अपनी पसंद का महीना, यात्रियों की संख्या और सड़क या हेलीकॉप्टर में से पसंदीदा विकल्प बताइए। नीचे फ़ॉर्म भरें — हमारी टीम आपको कॉल करेगी और पूरी योजना सरल भाषा में समझाएगी।

Talk to Our Yatra Expert

Not sure which yatra suits your family, or when to go? Leave your number and our team will call you at the time you choose. No obligation, no online payment needed.

Request a call-back

We use your number only to talk about your yatra.

Read this page in English